When is DIWALI 2020 Dates | 2020 में दीपावली कब है

Diwali 2020 Dates :

हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्यौहारों में एक Diwali 2020 इस साल अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 14 नवंबर दिन शनिवार और हिन्दू पंचाग के हिसाब से कार्तिक मास के अमावस्या  को मनाया जायेगा | 

पांच दिनों तक चलने वाली दिवाली 2020 पूरे भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशो जैसे नेपाल, इंडोनेशिया , श्री लंका , बाली  में बड़े ही धूमधाम और हर्षोउल्लास के साथ  मनाया जाता है | जिसमे ऐसे देश शामिल है जहाँ या तो भारतीय काफी संख्या में निवास करते है , या फिर पौराणिक काल में ऐसे देशो का सम्बन्ध भारत वर्ष से रहा  है  और उन पर भारतीय संस्कृति की गहरी छाप रही  है | 

दिवाली को बहुतायत में लोग दीपावली 2020 ( Deepawali 2020 ) और लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जानते  है |  

Deepavali 2020 (  दीपावली 2020 ) को “दीपोत्सव” के नाम से भी जाना जाता है, यानि “दीपो का उत्सव ( Festival of Lights).   

दीपावली क्यों मनाते है ? [ Why Deepawali 2020 is celebrated ? ]

Diwali 2020 Dates क्यों मनाई जाती है

हिन्दू पौराणिक मान्यताओं और कथाओ के अनुसार हिन्दुओ के परम आराध्य और भगवान श्री विष्णु के अवतार व अयोध्या के राजा भगवान् श्री राम  चौदह वर्षो के वनवास के पश्चात् और लंकापति रावण का वध करके, तत्पश्चात लंका पर विजय पताका पहरने के बाद अपनी राजधानी अयोध्या कार्तिक मास के अमावस्या को वापस आये थे | उनके साथ उनकी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण भी साथ आये थे | 

अयोध्या के निवासी अपने प्रतापी, लोकप्रिय , न्यायप्रिय  राजा और मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम के आगमन से प्रफुल्लित हो उठे थे | उनके आने की ख़ुशी में अयोध्या की प्रजा ने अपने अपने घरो में “घी के दीप” जलाकर उनका हृदय से स्वागत किया था |

कार्तिक मास की गहरी अँधेरी रात में पूरी अयोध्या दियों की रौशनी से जगमगा उठी थी | 

भारत के बहुत सारे क्षेत्रो में किसानो के द्वारा इस दिन को अपनी फसल को खेतो से काट लाने के ख़ुशी में मनाया जाता है | अपनी ख़ुशी का इज़हार ये किसान घी या तेल के दीपक जला कर करते है | इसी कारण इसको दीपोत्सव भी कहा जाता है | 

What are the 5 days of Diwali 2020 Dates ?

Diwali 2020 Dates : 

हिन्दू धर्म के मनाये जाने वाले पर्वो में एक प्रमुख पर्व  दिवाली  का त्यौहार पांच दिनों तक मनाया जाता है | यह “धनतेरस” से शुरू होता है और इसे “भाई दूज” तक मनाया जाता है | 

इन पांच दिनों में विधि विधान से विभिन्न भगवानो की पूजा अर्चना विभिन्न निहितार्थ से की जाती है | जिसका सिलसिलेवार विवरण निम्नानुसार है | 

दीपावली उत्सव के 5 दिन [ 5 Days of 2020 Diwali Dates ]

List of 5 Days of Diwali 2020 Dates 

  1. धनतेरस 
  2. नरक चतुर्दशी 
  3. लक्ष्मी पूजा 
  4. गोवर्धन पूजा 
  5. भाई दूज 

1. धनतेरस 2020 [ Dhanteras 2020 ]

पांच दिवसीय दिवाली पर्व (Diwali 2020 Dates )   के पहले दिन को “धनतेरस” के नाम से जाना जाता है |

धनतेरस 2020  [ Dhanteras 2020 ] कार्तिक मास के त्रयोदशी को मनाया जाता है | धनतेरस को “धन त्रयोदशी” और “धन्वंतरि जयंती” भी कहा जाता है | क्योंकि समुद्र मंथन में  आयुर्वेद के जनक एक भगवान् धन्वंतरि हाथ में “स्वर्ण और अमृत कलश” लिए हुए , आज के ही दिन ही  अवतरित हुए थे | 

आज के दिन भगवान् धन्वंतरि की पूजा माता लक्ष्मी के साथ की जाती है  | उसके पहले सांध्य काल में घर के द्वार और आँगन में सुन्दर रंग बिरंगी रंगोली [ Rangoli ] बनायीं और आटे के रोली से मुख्य द्वार को सजाया जाता है |  

धनतेरस के दिन ही धन के देवता “श्री कुबेर” की पूजा भी की जाती है | हिन्दू धर्म में ऐसी प्रगाढ़ मान्यता है कि आज के दिन भगवान् कुबेर की पूजा अर्चना करने से और श्रद्धापूर्वक आराधना करने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती | 

पूजा के पश्चात् आटे के 13 [ त्रयोदश ] दिए जलाये जाते है और उन्हें घर के द्वार पर रखा जाता है | ऐसे मान्यता है कि इस दिन  भगवान धन्वंतरि की श्रद्धापूर्वक  पूजा अर्चना करने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं और पूरा घर धन धान्य से हमेशा भरा रहता है | इसी कारण धनतेरस के दिन चाँदी, सोने , पीतल और तांबे के सामान खरीदने को शुभ माना जाता है | 

धनतेरस के दिन भगवान् यमराज की भी पूजा की जाती है | ऐसी मान्यता है कि आज के दिन भगवान् यम की पूजा करने से घर परिवार में किसी की भी  “अकाल मृत्यु” का भय नहीं रहता | 

धनतेरस 2020 और दिवाली 2020 Dates के बारे और ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करके जानकारी ले सकते है  | धनतेरस पर्व की मुहूर्त और पूजा विधि 

धनतेरस 2020 मुहूर्त

2. नरक चतुर्दशी 2020 [ Narak chaturdashi 2020 ]

Divali 2020 Dates के पांच दिवसीय पर्व के दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी या नरक निवारण चतुर्दशी कहा जाता है | 

हिन्दू धर्म में नरक चतुर्दशी का बहुत महत्व है | क्योंकि इसे  पापो से मुक्ति का पर्व कहा जाता है | 

पौराणिक मान्यता और कथाओ के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध करके जन जन को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी | 

ऐसा माना जाता है , इस दिन सूर्योदय के पहले उठने और फिर स्नान करके ईश्वर की आराधना करने से, मृत्यु के बाद  नरक लोक नहीं जाना पड़ता | 

नरक चतुर्दशी की दूसरी मान्यता है कि इस दिन भगवान् विष्णु ने महाराजा बलि को वामन रूप में दर्शन दिया था और आशीर्वाद दिया था | 

नरक चतुर्दशी के दिन पुरे घर की साफ सफाई की जाती है और रात्रि में भगवान् यमराज को अर्पित करते हुए तेल के चौदह दिए जलाये जाते है | ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान् यम को दीपदान करने से वो प्रसन्न रहते है और अकाल मृत्यु से मुक्ति देते है | 

नरक चतुर्दशी 2020 कब है ? [ When is Narak Chaturdashi 2020 ? ]

इस साल नरक चतुर्दशी २०२०, 14 नवंबर को कार्तिक मास के चतुर्दशी को मनाया जायेगा | 

नरक चतुर्दशी मुहूर्त :

अभ्यंग स्नान मुहूर्त – सुबह 5 बजकर 23 मिनट से सुबह 6 बजकर 43 मिनट तक (14 नबंवर 2020)

नरक चतुर्दशी के दिन चन्द्रोदय का समय – सुबह 5 बजकर 23 मिनट (14 नबंवर 2020)

चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – शाम 5 बजकर 59 मिनट से (13 नबंवर 2020)

चतुर्दशी तिथि समाप्त – अगले दिन दोपहर 2 बजकर 17 मिनट तक (14 नबंवर 2020)

3 . लक्ष्मी पूजा [ Laksmi puja 2020 ]

दिवाली 2020 ( Diwali 2020 Dates ) के तीसरे दिन को ही असली दिवाली मनाई जाती है | आज  ही  के दिन भगवान श्री राम 14 वर्षो का वनवास काट कर अयोध्या वापस आये थे | उनके आने की ख़ुशी में अयोध्या वासियो ने बंदनवार सजाकर और दीप प्रज्वलित करके खुशियाँ मनाई थी | 

 दिवाली के दिन धन और संपत्ति की देवी “माँ  लक्ष्मी” की पूजा- अर्चना की जाती है | समुद्र मंथन में माँ लक्ष्मी अपने हाथो में रत्नो और मुद्राओ के कलश लिए प्रकट हुई थी | 

दिवाली  के दिन जिस घर में पुरे मनोभाव, श्रद्धाभाव और विधि विधान से माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है , ऐसी मान्यता है की वहां दरिद्रता कभी नहीं आती | ऐसी भी मान्यता है की जिन घरो में गन्दगी हो, कूड़ा करकट हो और आपसी कलह हो वहां माँ लक्ष्मी कभी निवास नहीं करती | 

इसी कारण , दिवाली पर्व शुरू होने के पूर्व सभी लोग अपने घरो की अच्छे तरीके से साफ़ सफाई करते है | नए रंग रोगन करते है | पुराने समानो त्याग करते है | कबाड़ और कूड़ा करकट घरो से निकाल कर घर से दूर फेंक देते  है | ताकि माता लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सके |  

दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त में सपरिवार पुरे विधि विधान से माँ लक्ष्मी, भगवान् गणेश जी और धन के देवता “धन कुबेर” की पूजा की जाती है और विशेषकर कमल के फूल उन्हें अर्पित किये जाते है | सुगन्धित धुप, लौ भान और सुगन्धित अगरबत्तियों जलाई जाती है | जिसे पूरा घर सुगन्धित हो उठता है | ऐसी मान्यता है की ऐसे सुगन्धित वातावरण से माँ लक्ष्मी प्रभावित होती है और प्रसन्न होकर ऐसे घरो में स्थाई रूप से निवास करती है |  पुरे घर को  मिटटी के बने दियो में “दीप प्रज्वल्लन”  करके सजाया जाता है | पुरे घर को रंग बिरंगे लाइट , झालर और दीप मालिकाओ से सजाया जाता है | 

दिवाली के दिन, श्रद्धालु गण अपने घरो में अच्छे अच्छे मीठे पकवान और स्वादिष्ट व्यंजन बनाते है | माता लक्ष्मी को मिष्ठानो , लाई  बतासो और  फलो का भोग लगाया जाता है और अंत में माँ लक्ष्मी जी की घंटी घड़ियालों के साथ  “आरती” की जाती है | 

पूजा संपन्न होने के पश्चात् परिवार के सभी सदस्य दूध, दही, मिश्री , शहद मिश्रित “पंचामृत” के साथ प्रसाद ग्रहण करते है | 

आधुनिक काल में “आतिश बाजी” भी चलन में आया  है | हालांकि शास्त्रों और ग्रंथो में आतिशबाजी का उल्लेख नहीं मिलता है |

घर के सभी सदस्य विशेषकर बच्चे विभिन्न प्रकार के आकर्षक पठाखे चलाकर खुशियां मनाते है   | 

घर के सभी छोटे अपने पूज्यनिय और आदरणीय बड़े बूढ़ो का पैर छू कर आशीर्वाद लेते है | परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे को दिवाली की शुभकामना देते है | 

अंत में घर के सभी सदस्य साथ मिलकर बने हुए व्यंजनों और मिष्ठानो का आनंद लेते है | 

दीपावली कब है 2020 / लक्ष्मी पूजा कब है ?

इस साल दिवाली 2020, 14  नवंबर को लक्ष्मी पूजा होगी |

लक्ष्मी पूजा 2020 शुभ मुहूर्त [ lakshmi puja shubh muhurat ]

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – शाम 5 बजकर 28 मिनट से शाम 7 बजकर 24 मिनट तक (14 नबंवर 2020)

प्रदोष काल – शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 07 मिनट तक

वृषभ काल – शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 7 बजकर 24 मिनट तक

अमावस्या तिथि प्रारम्भ – दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से (14 नबंवर 2020)

अमावस्या तिथि समाप्त – अगले दिन सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक (15 नबंवर 2020) 

मां लक्ष्मी जी की आरती

ओउम् जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।

उमा रमा ब्रहमाणी, तुम ही जग-माता। सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि पाता।

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता। कर्म-प्रभाव प्रकाशिनि, भव निधि की त्राता।।

जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता। सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।।

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता ।।

शुभगुण मंदिर सुंदर, श्रीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता।।

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।

उर आनंद समाता, पाप उतर जाता । 

ओउम् जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।।

ओउम् जय लक्ष्मी माता …

लक्ष्मी जी की आरती वीडियो में

4. गोवर्धन पूजा 2020 :

दिवाली ( Diwali 2020 Dates ) के अगले दिन यानि दीपावली पर्व के चौथे दिन “गोवर्धन पूजा” जिसे “अन्न कूट पूजा” भी कहते है , मनाई जाती है | इस साल यह 15  नवंबर दिन रविवार को मनाया जायेगा | 

पौराणिक कथाओ और हिन्दू धर्म के शास्त्रों में दिए गए उल्लेख के अनुसार भगवान् श्री कृष्ण ने ब्रज वासियो को मूसलाधार अति वृष्टि से बचाने के लिए पुरे सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत ( गंधमर्दन पर्वत ) को अपनी छोटी ऊँगली पर उठा रखा था |

 वर्षा से बचने के लिए गोप गोपियाँ , गाये और अन्य पशु गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण लिए थे |  

सात दिनों के बाद जब वर्षा रुकी, तब कृष्ण भगवान् ने समस्त ब्रजवाशियो से कहा , चूकि गोवर्धन पर्वत के कारण हम सुरक्षित रह पाए ,और इन सात दिनों तक इस गोवर्धन पर्वत के कारन हमें “अन्न” प्राप्त हुआ , इसलिए हमें हर वर्ष “अन्नकूट”  के रूप में इसकी पूजा करनी चाहिए | भगवान् का आदेश मानते हुए सभी लोग अपने अपने घरो से  पाक पकवान बनाकर लाये और गोवर्धन पर्वत की पूजा की | 

इस दिन गेहू, चावल , बेसन से बनी कढ़ी और हरी सब्जियों से बने भोजन और पकवान बनाये जाते है और भगवान् श्री कृष्ण को अर्पित किया जाता है |  जिसे “छप्पन भोग” भी कहते है | 

गोवर्धन पूजा विशेषकर उत्तरप्रदेश, बिहार , छत्तीसगढ़ और अन्य हिंदी भाषी क्षेत्रो में बहुलता से मनाया जाता है | 

इस दिन “गौ माता” यानि “गायो” की पूजा की जाती है , क्योंकि वे भगवान् श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय है | 

भाई दूज 2020 ( Bhai Dooj 2020 )

सम्भवत: हिन्दू धर्म ही ऐसा धर्म है जिसमे भाई बहन के आपसी प्रेम और बहन की सुरक्षा के संकल्प को  दर्शाने के लिए वर्ष में ३  बार भाई बहन के रिश्ते पर आधारित त्यौहार रक्षाबंधन और भाई दूज मनाया जाता है | 

दिवाली पर्व  के पांच दिवसीय पर्व के पाँचवे और अंतिम दिन यानि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को “भाई दूज” का पर्व मनाया जाता है | 

इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है |

भाई दूज क्यों मनाया जाता है

भाई बहन के पवित्र रिश्ते को दृष्टिगत यह पर्व क्यों और कब मनाया जाता है | इसे जानने के लिए नीचे दिए कहानी को समझना जरुरी है | 

भाई दूज की कहानी

भगवान सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया के एक पुत्र यमराज और एक  पुत्री यमुना थी | दोनों ही साथ साथ खाते खेलते बड़े हुए | विवाह योग्य हों जाने पर बहन यमुना का विवाह हो जाता है | 

विवाह के पश्चात्  जब भी यमुना अपने भाई यमराज को घर आने को कहती और भोजन ग्रहण करने को कहती तो यमराज अपनी व्यस्तता के कारण अपनी बहन के आग्रह को ताल जाते थे | 

कार्तिक मास के द्वितीया के दिन यमुना अपने भाई यमराज को अचानक अपने घर आया देखकर प्रसन्न हो जाती है | 

यमुना अपने भाई यमराज का तिलक लगाकर स्वागत करती है और उन्हें स्नेह और आदरपूर्वक स्वादिष्ट भोजन कराती है | स्वादिष्ट भोजन पा कर यमराज अत्यंत तृप्त हो जाते है और प्रसन्न हो कर अपनी बहन यमुना कोई वर मांगने के लिए कहते है |  ऐसे में बहन यमुना अपने भाई यमराज से वर मांगती है कि हर वर्ष आज ही के दिन आप मेरे घर अवश्य आना और भोजन करना , इससे मुझे अत्यंत प्रसन्नता होगी | 

यमराज ने वर प्रदान करते हुए अपनी बहन का आग्रह मान लिया और उसके बाद से यमराज हर वर्ष आज के दिन अपनी बहन के घर जाते और भोजन ग्रहण करते | 

कालांतर में यह एक परंपरा बन गई और इन्ही बातो का अनुसरण करते हुए “भाई दूज” के दिन “भाई” अपने “बहन” के यहां जाते है | बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर स्वागत करती है और भोजन कराती है | भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते है | 

चित्रगुप्त पूजा ( Chitragupta Puja ) 

chitragupta puja 2020

कायस्थों के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है और यह वर्ग “भाईदूज” के पर्व के साथ आज दिन को “चित्रगुप्त पूजा” के रूप मनाता है | इस दिन सभी कायस्थ बंधु अपने आराध्य देव “भगवान्  चित्रगुप्त” की पूजा करते है | 

ऐसा कहा जाता है की भगवान् चित्रगुप्त भगवान विष्णु की  “काया” यानि शरीर से उत्पन्न हुए है | “भगवान् चित्रगुप्त” को “यमराज के सहायक” के रूप में भी जाना जाता है | चित्रगुप्त जी सभी मनुष्यो के “पाप और पुण्य” का लेखा जोखा रखते है और वे इस काम को लेखनी से किया करते है | 

इसीलिए कायस्थ गण आज के दिन अपने “कलम दवात” और “बही खातों” की पूजा करते है | कायस्थ वर्ग को भारत वर्ष में, कुशाग्र बुद्धि वाली , शिक्षा में दक्ष और अत्यंत बुद्धिजीवी वर्ग में गिना जाता है | 

Source : Godlywood Studio

भाई दूज कब है ?

भाई दूज 2020

16 नवंबर

भाई दूज तिथि – सोमवार, 16 नवंबर 2020

भाई दूज तिलक मुहूर्त – 13:10 से 15:17 बजे तक (16 नवंबर 2020)

द्वितीय तिथि प्रारंभ – 07:05 बजे से (16 नवंबर 2020)

द्वितीय तिथि समाप्त – 03:56 बजे तक (17 नवंबर 2020)

सारांश ( Conclusion ) 

तो यह रही दिवाली 2020 Dates पर्व की विस्तृत जानकारी | उम्मीद है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आयी होगी ? यदि कोई सुझाव और सलाह हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताये | 

यदि किसी और विषय में आप इसी तरह की जानकारी चाहते तो हमें अवश्य बताये | 

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दिवाली कब और कब मनाई जाती है
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दिवाली कब और कब मनाई जाती है
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दीपावली 2020 के पांच दिवसीय त्यौहार के बारे शास्त्र सम्मत व्याख्या के साथ दिवाली क्यों मनाई जाती है ? कब मनाई जाती है ? इसकी पौराणिक कथा क्या है और यह हिन्दू धर्म के लिए यह क्यों सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है | पूरी जानकारी यहां प्राप्त करे
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